Wednesday, June 9, 2010

नुक्कड़ नाटक दास्तान-ए-गैसकांड का एंडरसन प्रसंग


जादूगर    -    लड़के! सात समुन्दर पार जाएगा ?
जमूरा    -    पासपोर्ट नहीं है!
जादूगर    -    फिकर नहीं!
जमूरा    -    तो ठीक है उस्ताद, मगर काहे के वास्ते!
जादूगर    -    पकड़ लाने को!
जमूरा    -    किसको ?
जादूगर     -    एंडरसन को !
जमूरा    -    एंडरसन कौन ?

जादूगर    -    बहुराष्ट्रीय कम्पनी का मालिक, लाशों का सौदागर, अमरीकी पूँजीपति,   मुनाफाखोर, गरीब देशों की अवाम  की जान का दुश्मन, सफेद सुअर।

जमूरा    -    समझ गया, समझ गया उस्ताद। मगर अंग्रेजी नहीं आती।

जादूगर    -    फिकर नहीं, बस बैठ हवा के झोके पर, रुकना मत किसी के रोके पर, घुस जाना गोरों के देश में, पकड़ लाना एंडरसन को..................गिलि-गिलि-गिलि फूं...........

(जमूरा घेरे के चक्कर लगाता है, एंडरसन को पकड़ लाता है)

जमूरा    -    उस्ताद, पकड़ लाया, पकड़ लाया। बड़ी मुश्किल से हाथ आया है। के रिया था टेम नहीं है। डालर की एक बोरी उठाओ और उस्ताद और तुम मजमा-वजमा बन्द कर ऐश करना। जमूरे ने पटकनी मन्त्र सुनाया और कन्धे पर बिठाकर उठा लाया। उस्ताद, गोरा आदमी बड़ा नाराज़ है, इसे वेलकम गीत सुना दें। अगर ये नाराज़ हो गया तो हमारा देश इक्कीसवी सदी में कैसे जाएगा ? हमारे देश में लेटेस्ट टेक्नालॉजी कैसे आएगी ?

जादूगर    -     हाँ लड़के इसे गाना सुना।
                     (सब गाते हैं)
                     एंडरसन आया
                     डालर लाया
                    लाशों के ढेर पर मुँह फाड़-फाड़ कर
                    ठहाका खूब लगाया,
                    ठहाका खूब लगाया
                    अमरीका के गोरे ने
                    गिरफ्तार कर छोड़ दिया
                    भई डालर भर बोरे में,
                    डालर भर बोरे में
                    सत्ता यूँ मुस्काई
                    चलो खर्च निकले चुनाव के
                    शुक्रिया अमरीकी भाई,
                    शुक्रिया अमरीकी भाई देखो और भी आना
                    देश में और कम्पनी खोल कर कब्रिस्तान बनाना
                    कब्रिस्तान बनाना जनता हम दे देंगे
                    मगर ध्यान रखना समय-समय पर
                    नोट जरूर खिलाना................
एंडरसन    -    टूम लोग ये क्या गाटा ठा.........? हमको समझ नहीं आया। टुम हमको ट्रांसलेशन करके सुनाटा क्या ?   

जमूरा    -    हम तेरा वेलकम करटा। हमारे देश का परम्परा हाय, जो भी विदेशी आटा उसको एयरपोर्ट पर भक्तिगीत  सुनाटा हम लोग.............

एंडरसन    -    फरम्फरा! ये क्या होटा हाय ?

जमूरा    -    फरम्फरा मीन्स ट्रेडीशन-ट्रेडीशन!

एंडरसन    -    ट्रेडीशन, ओह ! पर ये टुम कैसा वेलकम किया। तुम्हारा सरकार ने टो हमारा बहुत अच्छा वेलकम किया। हमको एयरपोर्ट से हमारा कम्पनी का गेस्ट हाउस तक लाया। अच्छा खाने-पीने का इंटज़ाम किया। हमको बोला सर आप सात समुन्दर पार से आया, भूखा होगा, खाना खाओ, हम खाया, खूब खाया, खूब पिया और डंड पेला। फिर देखो टुम्हारा सरकार को हमारा कितना फिकर हाय। हमको बोला युवर एक्सीलेंसी, इधर टुम्हारा जान को खतरा हाय। टुमको डेहली भेजने को मांगता, बुरा नई मानने का। टुमको इंपोर्टेड कार में घुमायेगा-फिराएगा, ऐश करायेगा। स्टेट प्लेन से भोपाल और हिन्दुस्तान भर का खूबसूरत नज़ारा दिखायेगा। टुमको मालूम हमको रिक्वेस्ट किया टुम्हारा सरकार ने कि सर, हम एक नाटक करने को मांगटा, आपको हीरो बनाने को मांगटा। हम बोला, हज़ारों लोगों को जान से मारने के बाद हम टो वैसे ही     डुनिया का हीरो है। फिर भी हम बोला, ठीक है। टुमको मालूम नाटक का नाम ? ‘‘एंडरसन की गिरफ्तारी’’।
   
जादूगर    -    हाँ और उन्होंने जनता को मूर्ख बनाने के लिए एक नाटक किया। ‘‘एंडरसन की गिरफ्तारी’’। कानूनी ज़रूरत पूरी करने के बहाने हज़ारों लोगों के हत्यारे को छोड़ दिया 25 हज़ार की ज़मानत लेकर। जब अपराध हो रहा होता है तब हमारा कानून चुप बैठा रहता है। और जब अपराध हो चुकता है वह भी इतना भयानक कि हज़ारों लोग तड़फते हुए दम तोड़ देते हैं और लाखों लोग बीमारी से घिरे धीरे-धीरे दम तोडेंगे, तब ये कानूनी नाटक सिर्फ 25 हज़ार की ज़मानत पर खूंखार हत्यारे को खुद ब खुद छोड़ देता है। हां तो जमूरे करदे इस मौत के सौदागर को कटघरे में खड़ा और बांध दे इसकी शैतानी आँखों पर उगलवाऊ पट्टा.....................!
(जमूरा पट्टा बांधता है)
गोरे आदमी चला जा !

एंडरसन    -    किढर अमरीका ? लाओ-लाओ कार लाओ, प्लेन लाओ!   
जादूगर    -    खामोश!
                    अटरम सटरम बकना मत तू
                    खरी बात ही कहना
                    फेंक रहा हूँ उगलवाऊ मन्तर
                    ज़रा तमीज़ से रहना
                    गिलि गिलि गिलि गिलि फूं......................
                    गोरे आदमी लौट आ !
एंडरसन    -    लौट आया!
जादूगर    -    जनता सवाल पूछेगी जवाब देगा ?
एंडरसन    -    देगा!
जादूगर    -    झूठ तो नहीं बोलेगा ?
एंडरसन    -    बोलेगा भी तो टुम क्या कर लेगा ? टुम्हारा सरकार हमारा मुट्ठी में हाय...............!
जादूगर    -    चुप...................तू कौन.........?
एंडरसन    -    एंडरसन दी गे्रट !
जादूगर    -    हिन्दुस्तान क्यूं आया.........?
एंडरसन    -    ज़हरीली गैस के सक्सेसफुल एक्सपेरीमेंट पर हमारे हिन्दुस्तानी एजेन्टों को बधाई देने.............!
जादूगर    -    दे दी ?
एंडरसन    -    दे दी पर मज़ा नहीं आया । हम उनके काम से नाखुश हाय ..............
जादूगर    -    क्यूं ?
एंडरसन    -    बहुत कम मरे............
जादूगर    -    दस हज़ार कम है बे ?
एंडरसन    -    हमारा प्लानिंग तो पूरा शहर साफ करने का ठा !

जादूगर    -    सुन रहे है साहेबान, प्लानिंग तो इनकी पूरा शहर साफ करने की थी ! अगर पूरा देश, पूरी दुनिया साफ करने की भी होती तो कोई बड़ी बात नहीं.......... एंडरसन......!

एंडरसन    -    उस्ताद!
जादूगर    -    कम्पनी हमारे मुल्क में क्यों लगाई!
एंडरसन    -    टो क्या हमारे मुल्क में लगाटा..... हमारे यहाँ का लोग बड़ा कीमटी हाय!
जादूगर    -    हमारे यहाँ के नहीं हैं कीमती.............

एंडरसन    -    पालिसी उस्ताद पूँजीवाद की मेन पालिसी। भारत जैसे पिछडे़ देश में बिजनेस करना, गरीब लोगों को शोषण करना, साथ-साथ उन पर घातक रसायनों का, गैसों का प्रयोग करते रहना ताकि वक्त पड़ने पर कम से कम समय में ज़्यादा से ज़्यादा लोग मारे जा सकें और प्रापर्टी को कोई नुकसान न हो! हम टो भई टुमारे मंत्रियों-अफसरों को थोड़ा बहुत खिला-पिला डेटे हैं, उनके बेटों, भांजों-भटीजों को अच्छी नौकरी दे देते हैं, टुम्हारा सरकार को करोड़ों रुपया दान करते हैं और आराम से बिना रोकटोक के काम करटे हैं। देखा नहीं, भोपाल में इटना सब होने के बाद भी टुम्हारा डिल्ली का सरकार मल्टी नेशनल का स्वागट करता ! बोलटा इंडिया में और ज़्यादा विडेशी पूँजी लगाओ।

जादूगर    -    सुना है तुम्हारे यहां इस गैस पर पाबंदी है ?
एंडरसन    -    सवाल ही नहीं उठता! टो क्या हम बिजनेस नहीं करें! हमारी तो अब भी यह कोशिश रहेगी कि हमारा कारखाना भोपाल टो क्या हिन्दुस्तान भर से कहीं ना जाने पाए, हम डेखटे हैं कैसे जाता है.......?

जमूरा    -    नहीं चलेगी, नहीं चलेगी, नहीं चलेगी ये चालाकी
                   देख ली दुनिया ने अब झाँकी
                   बना रखे षड़यंत्रों की
                   चकनाचूर करेंगे हम सब नसें तुम्हारे तंत्रों की...............
उस्ताद, बहुत हो गई बकवास, अब जनता भड़करने को है। अगर भड़क गई तो यह गोरा बंदर अपने मुल्क नहीं जा पाएगा। इसको दो एक पहलवानी लात, खुद-ब-खुद हुक्म समझ जाएगा। नही दोबारा यहां आएगा।
(जादूगर और जमूरा दोनों मिलकर उसे लात मारते हैं। एंडरसन भीड़ में घुस जाता है।)

( गैस त्रासदी पर लिखे गए नुक्कड़ नाटक ‘‘दास्तान-ए-गैसकांड का अंश, लेखक-राजीव लोचन व प्रमोद ताम्बट। इस नाटक के प्रथम संस्करण का प्रकाशन 26 दिसम्बर 1984 को हुआ था। एंडरसन के संबंध में उठ रहे सवाल इस नाटक में आज से 26 साल पहले कितने सशक्त रूप में उठाए गए थे वह नाटक के इस एंडरसन प्रसंग से स्पष्ट है।मुख्य पृष्ठ का डिजाइन स्वर्गीय किशोर उमरेकर का है।)

17 comments:

  1. arase baad nukkad natak ka zikra hua. achchha lagaa. lekhako ko hastakshep karte rahanaachahiye. amerika ne jab irak par hamalaa kiyaa tha,tab maine uss vaqt bhi ek nukkad natak likha tha- ''jarz bhsh haay-haay'' khoob khela gayaa thaa. apkaa nukkad natak kararaa prahar kartaa hai.

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  2. जादूगर - बहुराष्ट्रीय कम्पनी का मालिक, लाशों का सौदागर, अमरीकी पूँजीपति, मुनाफाखोर, गरीब देशों की अवाम की जान का दुश्मन, सफेद सुअर।
    सफेद सुअर ये शब्द एकदम ठीक है बिदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनी का मालिक और हमारे देश में एक बिदेशी महिला दोनों के लिए ....उम्दा प्रस्तुती ..

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  3. @honesty project democracy
    I dont agree with his comment regarding Safed Suar.

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  4. jai ho !

    gazab kar diya

    pasand *****

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  5. Dr.Israr'Gunesh'June 9, 2010 at 11:04 PM

    Tambat ji, Kavita aur Nukkad Natak donon ke liye badhai.us bhayanak raat men khud bhi Bhopal men hi tha, aur jab Scooter se wapas Raisen aaya tab poori raat gas prabhavit logon ki sewa men hi baaqi ki raat aur agla hafta bit gaya.Zakhm abhi tak nahin bhare aur shayad agle pachas warsh tak nahin bhar payenge.Raj tantra kahan praja ke liye woh sab sochta hai jo ek samvedan sheel lekhak ya sahityakar. Aap isi tarah likhte rahen,hamesha...............hamesha.
    Dr.Israr 'Gunesh'
    Adhyaksha, HIMAKSHARA

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  6. वाह वाह

    प्रस्तुति...प्रस्तुतिकरण के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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  7. नुक्कड़ नाटक अच्छा है। यह और भी अच्छा हो सकता है। लंबे संवादों को छोटा-छोटा करके रखें तो पंच अच्छे आएंगे। व्यंग्य नाटक है, इसलिए इसमें व्यंग्य मुतवातिर नज़र आना चाहिए। विषय मौज़ूं हैं। मेरी दिल्ली तमन्ना है कि यह एक बेहतर नाटक बनें। इसके लिए इस पर आपको और काम करना होगा। मेरी बात सही लगे तो मानें, वरना इसे यहीं छोड़ दें।

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  8. ज्वलंत विषय पर लिखी गयी दमदार प्रस्तुति ..

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  9. uncle, bahot hi achcha article tha ...mujhe wo kaali raat abhi yaad hai ...Anjum 2 mahine ka tha aur main mahaz 4 saal ka ... us samay hum jahangirbaad mein rehte the .. .. aur papa bahot mushkil se scooter control per paa rahe the .. bhaot bahot zyaada "kaali" raat thi wo ...

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  10. प्रमोद जी ...आपका व आपके साथी द्वारा लिखा नाटक पढ़ा ...भोपाल वासी होने के नाते आपकी पीड़ा समझ पा रही हूँ.. ...अदालत का बेहद अफसोसजनक एवं शर्मनाक फ़ैसला है ....लग रहा है कि सजा नहीं बल्कि इनाम दिया जा रहा है|

    शैफाली पांडे

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  11. डा. विजय शिरडोनकरJune 13, 2010 at 11:15 PM

    भोपाल गैस त्रासदी की नित नयी खुलती परतें, लोकतंत्र के तीनो स्तंभों की मौका परस्ती, स्वार्थ और मतलब के लिए किसी भी हद तक झुकने की एक ऐसी अश्लील और वीभत्स दास्ताँ है जिसने आज तक की सारी सीमाएं तोड़कर रख दी हैं. जो अफसरशाही आम आदमी के लिए सिवाय अड़ंगे डालने के कोई दूसरा काम नहीं करती वही अपने आकाओं के आगे बेशर्मी की हद तक नंगे होने मैं भी गर्व महसूस कर रही है ! जो न्याय पालिका स्वयं के लिए माननीय, honourable, के सिवाय कोई और संबोधन सुनना पसंद नहीं करती वो ही नीचता की हद तक गिरने को तैयार है ! और जन प्रतिनधियों का कहना ही क्या धोखाधड़ी शब्द भी छोटा पड़ जाये ऐसी घिनोनी हरकत राजीव गाँधी और अर्जुनसिंह ने की है !
    अब तो एक ही उपाय है संविधान बदला जाये और सारी व्यवस्था पर फिर से विचार हो.

    डा. विजय शिरडोनकर
    भोपाल

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  12. प्रमोद जी
    नुक्कड़ नाटक व्यंग पढ़ा
    अच्छा लगा (इन्द्रसेन से एन्डरसन बना)यह हिंदी भाषा का कामाल है

    विदेश में देश वासी अपने माहान देश के नहीं करंगे
    भारत के रावण नेता ही करेंगे जो एक दुसरे पर आरोप लगा अपने को बचाना ( paas the buck )कहावत है अंगरेजी
    धन्यवाद
    गुड्डो दादी चिकागो से

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  13. आपका व्यंग पढ़ा आँखों से अश्रु धारा बह निकली
    कुछ नहीं होने का पैसा तो नेताओं के पेट में है विदेश में रहने वाले भारतीयों ने धन की सहायता भेजी .पहुची ही नहीं पीडीतों के पास

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  14. zabardast! Is natak ko wide scale par organize kariye aur satta ke poojariyon ko bataur atithi amantrit kariye.....zabardast

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  15. zabardast! Is natak ko wide scale par organize kariye aur satta ke poojariyon ko bataur atithi amantrit kariye.....zabardast

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  16. sare show yaad aa gaye

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