Wednesday, October 13, 2010

हरिभूमि में व्यंग्य - शेष रह गई भारतीय संस्कृति


//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//
            कॉमनवेल्थ खेलों का भव्य उद्घाटन समारोह को देखकर देश भर का वृहन्नला समाज आयोजन समिति से काफी खफा हो गया है क्योंकि उन्हें समारोह में भारतीय संस्कृति के धुँआधार मुज़ाहिरे में अपना अनोखा हुनर दिखाने का मौका नहीं मिला, जबकि खांटी देसीपने के प्रदर्शन में फुटपाथ छाप सभी प्रकार के लोग, अपनी ओव्हर एक्टिंग के जरिए विदेशी मेहमानों को मोहने में लगे थे। डिब्बा वाले, सायकल वाले, ऑटो वाले, चाय वाले, पान वाले, सिगरेट बीड़ी वाले शायद नाई, धोबी, मोची तक अपनी-अपनी पेशेवर खूबियों के साथ जमावड़े में मौजूद थे। वृहन्नला भाई-बहनों का कहना है कि जब तमाम नृत्यांगनाएँ, यहाँ तक कि कठपुतलियाँ तक नचाई जा सकती हैं तो फिर हम गरीब बान्दियों ने क्या गुनाह किया था जो सदियों से अपनी कला का प्रदर्शन कर लोगों का मनोरंजन करते आ रहे हैं।
            मैंने एक आयोजन समिति के एक सदस्य से यूँ ही पूछने के लिए पूछ लिया कि वृहन्नलाओं की इस नाराज़गी का उनके पास क्या जवाब है तो उन्होंने सिर खुजलाते हुए जवाब दिया - जवाब तो कुछ नहीं है, जब सभी नाच रहे थे तो वे भी नच लेते, किसी के बाप का क्या जाता मगर दिक्कत यह थी कि, वैसे ही हम पैसे माँगने के आरोपों से निजात नहीं पा पा रहे हैं, ये वृहन्नलाएँ अगर मेहमानों के सामने पैसे के लिए हाथ फैलाने लगतीं, तो देश की छवि का नाश हो जाता। क्या अच्छा लगता प्रिन्स चार्ल्स के सामने छक्के' खाड़-खाड़ ताली बजाकर नाचते और फिर पाँच सौ एक रुपये के लिए उनकी इज्ज़त का फालूदा बना देते।
            मैंने कहा, हमारे देश में भिखारियों के भीख माँगने का अन्दाज़ भी कितना निर-निराला है उन्हें भी तो भारत दर्शन में शामिल किया जाना चाहिए था, परन्तु उन्हें तो आपने दिल्ली की सीमा से खदेड़ बाहर किया। वे बोले, देश की छवि की कृतिमता को बनाए रखना हमारे लिए बहुत ज़रूरी था, वर्ना आइन्दा कोई अन्तर्राष्ट्रीय इवेन्ट हमें मिलता क्या ?
          मैंने पूछा अब समापन समारोह में क्या होने वाला है ? वे बोले, समापन होगा। मैंने कहा मतलब भारतीय संस्कृति के शेष रह गए आयटम पेश किये जाऐंगे या नहीं। वे बोले, यह तो गोपनीय है। मैंने कहा फिर भी कुछ अन्दाज़ तो दीजिए। वे बोले, हो सकता है राखी सावन्त का आयटम पेश किया जाए, या शाहिद कपूर को नचाया जाए, वे भी आखिर भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं। मैंने सलाह दी असली भारतीय संस्कृति को तो आपने बुरी तरह नज़रअन्दाज़ कर रखा है। नवरात्र चल रहे हैं, शेरों वाली माता का जगराता, भजन कीर्तन, भंडारा भी हो सकता है। दशहरा आने वाला है, देश में जाने कितनी रामलीला करने वाली मंडलियाँ है उनमें से किसी को भी आमंत्रित किया जा सकता है, साधु संत समाज के प्रवचन भी कराए जा सकते हैं, यह सब भी भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं। 
          वे कहने लगे, इस कॉमनवेल्थ के बाद हम ओलम्पिक के सबसे बड़े दावेदार बनकर उभरे हैं, उसके लिए भी तो कुछ आयटम बचा कर रखना जरूरी है, वृहन्नलाओं के आयटम समेत हम हर चीज़ ओलम्पिक के लिए बचाकर रखेंगे।

4 comments:

  1. अब बताईये कि किस ग्रुप में भाग लें।

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  2. हे भगवान अबके ओलंपिक होगा !?!

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  3. रोचक व्यंग्य...अच्छा लगा पढ़कर...बधाई.



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    'शब्द-सृजन की ओर' पर आज निराला जी की पुण्यतिथि पर स्मरण.

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