Tuesday, February 8, 2011

तिहाड़ में कैम्पस

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//
          देश की कुछ चुनिंदा कम्पनियाँ कैम्पस सिलेक्शन के लिए तिहाड़ जेल जाएँगी, शरीर में झुरझुरी पैदा कर देने वाली खबर है। उन बहादुर कम्पनियों को दिल से दाद देने का मन कर रहा है जो खूँखार अपराधियों के गढ़ में घुसकर कैम्पस-कैम्पस खेलने का दुस्साहस करने वाली हैं। सिलेक्शन में अन्तिम निर्णय कम्पनी वाले करेंगे, या दुर्दान्त अपराधीगण अधिकारियों की गरदन पर छुरी रखकर अपने अपाइंटमेंट लेटरों पर दस्तखत करवाएँगे यह बात भविष्य के गर्भ में है।
          खैर, खबर पूरी पढ़ने से पहले मुझे तो लगा था कि अपराधियों ने भी कहीं प्रायवेट लिमिटेड कम्पनियाँ बनाकर अपराध करना तो शुरू नहीं कर दिये। कम्पनियों को अपने स्वार्थ-संधान के लिए अपराध करते हुए या अपराधियों से सांठगाँठ कर काम्पीटीटरों को चमकवाते हुए तो सुना था, कुछ कम्पनियों द्वारा रिकवरी एजेंटों के रूप में गुंडे पालने की खबरें भी बहुत सुनी हैं, मगर सोचिए अपराधी भी अगर कम्पनी लॉ के अन्तर्गत प्रायवेट लिमिटेड कम्पनी बनाकर बाकायदा सरकार को टेक्स देते हुए अपना धन्धा चलाएँ तो देश कहाँ से कहाँ पहुँच जाए। अपराधकर्मों की तादात देखते हुए कहाँ जा सकता है कि खजाने में टेक्स जमा होने के सारे रिकार्ड ध्वस्त हों जाएँगे। चोर-डाकुओं, पेशेवर अपराधियों, कातिलों-बलात्कारियों की प्रायवेट लिमिटेड कम्पनियाँ तिहाड़ जेल जाकर पेशेवर अपराधियों का कैम्पस सिलेक्शन करें इससे इससे बढ़िया और क्या बात हो सकती है! बाहर बेचारे पढ़े-लिखे बेरोज़गार भले ही यहाँ-वहाँ फटके खाते फिरें, अन्दर बन्द अपराधियों का तो भला होगा।
          क्या सीन होगा, जेल के नोटिस बोर्ड पर नोटिस चस्पा है- कल प्रातः ग्यारह बजे जेल की सेल नम्बर पाँच के अन्दर एक डकैत कम्पनी के लिए बैंक लुटेरों का कैम्पस सिलेक्शन किया जाएगा। योग्य एवं अनुभवी उम्मीद्वार अपने विस्तृत बायोडाटा के साथ निश्चित स्थान पर उपस्थित हों। प्रायोगिक परीक्षा के लिए सभी आवश्यक उपकरण कम्पनी द्वारा उपलब्ध कराएँ जाएँगे। वेतन के साथ-साथ लूट की रकम में कमीशन की सुविधा। या, एक मर्डर कम्पनी को चतुर-चालाक शार्प शूटरों की आवश्यकता है, योग्य उम्मीद्वारों का कैम्पस सिलेक्शन एवं प्रेक्टिकल टेस्ट सेल नम्बर दस के प्रांगण में सम्पन्न होगा। सभी इच्छुक शार्प शूटर अपना-अपना कट्टा लेकर निश्चित समय पर उपस्थित हों।
          एक और बानगी-एक निजी बलात्कार कम्पनी को अपने फेंचाइजियों के लिए अनुभवी और तेज़तर्राट बलात्कारियों की आवश्यकता है। तीन या तीन से अधिक बलात्कारों का अनुभव रखने वाले योग्य उम्मीद्वारों को प्राथमिकता दी जाएगी। वेतन एवं अन्य सुविधाएँ योग्यता अनुसार। अपने ट्रेक रिकार्ड के साथ पुलिस डिपार्टमेंट का अनुभव प्रमाणपत्र लेकर कैम्पस सिलेक्शन में उपस्थित हों।
          इसी तरह जेबकटी, चोरी-चकारी, उठाईगिरी, नकबजनी, चेन-मोबाइल झपटमारी जैसे टुच्चे अपराधों, कमीशन और रिश्वतखोरी, घोटालेबाजी, गबन इत्यादि जैसे राजसी अपराधों और मिलावट, नकली सामान बेचने, जमाखोरी, मुनाफाखोरी, कालाबाज़ारी आदि-आदि पारम्परिक अपराधों के लिए भी इच्छुक पेशेवर भाई लोग कम्पनी रजिस्टर करा कर कैम्पस सिलेक्शन चालू कर सकते हैं।
          पहले मैं सोचता था, बेरोजगारों को यदि नौकरी मिल जाए तो वे बेचारे अपराधी क्यों बनें, लेकिन अब सोचता हूँ कि अच्छा है अपराधी बन कर कम से कम नौकरी की गारंटी तो है।

7 comments:

  1. हा..हा..हा..मजेदार व्यंग्य.

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    'पाखी की दुनिया' में भी तो वसंत आया.

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  2. ये बात आज पता चली कि कम्पनियां कैम्पस सिलेक्शन के लिए तिहाड़ जेल का भी रुख कर रही हैं.
    बहुत ही सधा व्यंग्य किया है आपने जो लोगों को चेताने के लिए ज़रूरी भी है.

    बसंत पंचमी की शुभ कामनाएं.

    सादर

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  3. प्रायोगिक परीक्षा के लिए सभी आवश्यक उपकरण कम्पनी द्वारा उपलब्ध कराएँ जाएँगे। वेतन के साथ-साथ लूट की रकम में कमीशन की सुविधा।

    भई वाह क्या व्यंग है....बहुत मजेदार

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  4. तगड़ा व्यंग। वैसे आजकल की कंपनियों के हेरा फेरी वाले काम तो तिहाड़ जैसे ही हैं।

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  5. निश्चय ही कं.वैधानिक लुटेरे ही हैं.

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  6. शानदार प्रस्तुति से पूर्ण रोचक व्यंग.

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