Sunday, May 22, 2011

उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//
          अभी कुछ ही दिन पहले एक कोतवाल और चोर की आपसी बातचीत का टेप लीक होकर मेरे पास पहुँचा। उल्टा चोर कोतवाल को कैसे डाँटता है यह जानने के लिए टेप हुबहू पाठकों के सामने पेश है।
कोतवाल   -     मिस्टर! यह अच्छी बात नहीं है, आपने हमारे सबसे बड़े दुश्मन को अपने घर में पनाह दी।
चोर      -     कौन कहता है हमने उसे पनाह दी, उसने खुद ले ली तो हम क्या करें! हमने उससे थोड़े ही कहा कि हमारे घर में आकर रहो!
कोतवा    -    श्रीमान जी हमारा मुजरिम आपके इलाके में ठाठ से रहता पाया गया है, आपकी मर्जी के बगैर यह संभव ही नहीं था।
चोर        -     फालतू बात मत करो, हमने उसे पैदा किया ? हमने उसे सर पर चढ़ाया ? खामोखा अपनी गलतियों का ठीकरा हमारे सिर पर फोड़ने की कोशिश मत करो।
कोतवाल    -     भाई ! तुम्हारी आई. एस. आई. की जानकारी के बगैर तुम्हारे मुल्क में पेड़ पर पत्ता भी नहीं हिलता, बिना उसकी जानकारी के वह फौजी इलाके में ठाठ से कैसे रह सकता था ?
चोर      -    हमारी आई. एस. आई. तो माना काहिल है, मक्कार है, चार सौ बीस है, बदमाश और धोकेबाज़ है मगर तुम्हारी सी.आई.ए. तो दूध की धूली है! वह क्यों अंधी बनकर बैठी थी हमारे मुल्क में ? इतना बड़ा दाढ़ी वाला उसे नहीं दिखा ?   
कोतवाल    -     भाई आई.एस.आई का काम था यह तो......
चोर      -     क्या आई.एस.आई., आई.एस.आई  की रट लगा रखी है। आई.एस.आई को क्या और कोई काम नहीं है! हमने उसे सिर्फ भारत की जासूसी करने और वहाँ गड़बड़ियाँ पैदा करने के लिए बनाया है, फालतू अपनी बेगार उसे मत टिपाओ। वैसे भी वह आँख पर पट्टी बाँधे भारत के ही खयालों में खोई रहती है, अगर उसे कहीं इस्लामाबाद की सड़क पर भी ओसामा मिल जाता तब भी वह उसे पलट कर नहीं देखती।
कोतवाल    -     भाई यह अच्छी बात नहीं है।
चोर      -     क्या अच्छी बात नहीं है! तुम लोगों ने हॉलीबुड स्टाइल में हमारे घर में घुसकर हमारे पड़ोसियों के ओसान बढ़ा दिए, पड़ोस का बच्चा-बच्चा आज हमारी हँसी उड़ा रहा है। अब वे भी सील मछली का भेस धरकर हमारे घर में घुसकर अपने मुजरिमों को उठा ले जाने के ख्याब देख रहे हैं, सब तुम्हारी वजह से। ठीक है, अपना घर समझकर जो किया सो किया, दुनिया भर में ढिंढोरा पीटने की क्या जरूरत थी। 
कोतवाल    -     मगर भाई हम इतने दिनों से तुम्हारी दाल           -रोटी चला रहे हैं, तुम यूँ अपने अन्नदाता को धोका दोगे हमने सोचा नहीं था।
चोर       -     सोचा तो हमने भी नहीं था। हम इतने दिनों से तुम्हारे पॉव धो-धोकर पी रहे हैं, तुमसे इतना नहीं बना कि, ओसामा की लाश को उठाकर भारत की सीमा में कहीं भी ले जाते और वहाँ अपना वह सील मछली वाला नाटक करके भारत को बदनाम करते!
कोतवाल    -     पागल हो गए हो! दुनिया जानती है तुम कितने बड़े शैतान हो। तुमने भारत के मुजरिमों को भी पनाह दे रखी है।
चोर       -     उखाड़ लो क्या उखाड़ते हो। तुम हो या कोई ओर हो, आइंदा के लिए समझा रहे हैं, किसी ने अगर ऐसी हिमाकत की तो हम ईंट का जवाब पत्थर से देंगे।
कोतवाल   -    क्या मतलब है, कोई ईंट मारेगा तो तुम उसे पत्थर से मारोगे। भाई, ईंट-पत्थर की लड़ाई का ज़माना चला गया, अब तो मिसाइलों का दौर है।
चोर        -     हाँ हाँ, हमको कमज़ोर मत समझो, हम सबकी खटिया-खड़ी कर देंगे।
कोतवाल    -      चोर भाई, कुछ भी कहो यार, तुमने आतंकवाद का साथ तो दिया है।
चोर       -     हाँ हाँ दिया है, और आगे भी देंगे। तुममे दम है तो अब दोबारा ऐसी हरकत करके दिखाओ, हम तुम्हारी ऐसी-तैसी कर देंगे।
कोतवाल    -     चोर भाई लगता है तुम्हें मौत से डर नहीं लगता !
चोर       -     हौ, मौत से डरते होते तो ओसामा को अपने घर में छुपाकर रखते ?
      इसके बार चू ची झररररररररर की आवाज़ के साथ टेप में सन्नाटा छा गया।

7 comments:

  1. बहुत सार्थक व्यंग्य है सर!

    सादर

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  2. व्यंग्य की तलवार और प्रहार जोरदार ,वाह वाह ...

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  3. अभी तक येही सोचते थे की हिंदुस्तान महान है, अब मालूम हुआ की पाकिस्तान तो हम से भी महान है............बहुत बढ़िया जी.
    जोली अंकल

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  4. बड़ी जोर का लपडियायो है!हो सकता है सीआईए बुरा मान जाए ,आईएसआई की तो गरंटी है कि ऐसी-वैसी बातन पर ऊ ध्यान नय देत हैं !

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