Friday, October 21, 2011

भारतीय रेल और तेलंगाना आन्दोलन

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//
  बरसों से सुलग रही तेलंगाना आन्दोलन की आग फिर भड़कने को है। इस आग में क्या-क्या स्वाहा होगा कौन जाने! फिलहाल तो इस आन्दोलन का पूरा नज़ला भारतीय रेल विभाग, भारतीय रेल, और भारतीय रेल यात्रियों पर उतर रहा है। पता नहीं आन्दोलनकारियों को किसने यह बता दिया है कि भारत सरकार में, राज्यों को टुकड़े-टुकड़े कर (मैं चील कौओं को खिलाने की बात नहीं कर रहा हूँ) छोटा करने का रचनात्मक कार्य रेल विभाग के जिम्में है। इस गलतफहमी के चलते पूरे आंध्रप्रदेश भर में आन्दोलनकारी राशन-पानी लेकर रेल पटरियों पर बैठे रेलगाड़ियों का इन्तज़ार कर रहे हैं-सुसरी तू आ तो सही, तेरी चटनी बनाते हैं।
रेल विभाग भी आखिर भारतीय रेल विभाग है। तू डाल-डाल तो मैं पात-पात की तर्ज पर उसने आध्र्रप्रदेश की दिशा में जाने वाली अधिकांश रेलों के इंजनों में ताला जड़कर उन्हें वहाँ खड़ा कर रखा है जहाँ आन्दोलनकारी न पहुँच पाएँ। तेलंगाना आन्दोलन की आग से सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए रेलों को दूसरे राज्यों से गुजारा जा रहा है ताकि कोई पथराव इत्यादि कर उन्हें लोहूलुहान न कर दे। यात्रियों की सुविधा के लिए यह दूरी पाँच-सात सौ किलोमीटर मात्र रखी गई है। आन्दोलनकारियों के लिए भी यह एक चुनौती है-आओ बेटा, इतनी दूर पैदल चलकर कैसे आते हो आत्महत्या करने!
तेलंगानावादियों और रेल विभाग की इस आँख मिचैली में यात्रीगण बेचारे हैरान-परेशान हैं, जैसे कि रेल सफर में अक्सर रहते हैं। न घर के रह गए हैं न घाट के, पड़े हुए हैं किसी अनजान प्लेटफार्म पर भूखे-प्यासे, मच्छरों का ताज़ा भोजन बने! आन्दोलनकारियों के डर से कोई रेल उन्हें आंध्रप्रदेश की दिशा में ले जाने को तैयार नहीं है। मेहरबानी कर ले भी जा रही है तो न जाने कहाँ-कहाँ घूमाकर, किस अनजान स्टेशन पर पटक रही है, बिना इस परवाह के कि बेचारे यात्रियों के जेब में अपने गणतव्य तक पहुँचने के लिए रोकड़ा है भी या नहीं! वापसी के लिए वहाँ से कोई साधन भी मिलेगा या नहीं! तुम बैठे हो रेल में अब तुम्हीं भुगतो। हमने तो एनाउंसमेंट किया था, हमारी कोई ज़िम्मेदारी नहीं है। यात्री बेचारा हतप्रभ है कि भारतीय रेल को कोसे या तेलंगाना-प्रेमियों को!

4 comments:

  1. जब सबका प्यार रेल पर ही उमड़ने लगे तो क्या करें लोग।

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  2. बहुत सही सर!

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    कल 22/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. बहुत सटीक और सार्थक आलेख..

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  4. सचमुच संडे का पूरा आनंद ले रहे हैं आप जो न देख पाये हैं आज की यह खुशनुमा हलचल :) आज कीनई पुरानी हलचल

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