Saturday, May 24, 2014

जीत का मातम हार का जश्न

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//
बिना हार-फूल पुष्प-गुच्छों के पार्टी की ‘‘आभार एवं धन्यवाद सभा’’ ऐसी लग रही थी जैसे किसी की शोक सभा हो रही हो। अधिकांश सदस्य अपनी बाँछें घर पर ही रखकर आए थे।
                अध्यक्षीय भाषण शुरू हुआ। प्रिय साथियों, आप जानते ही हैं कि आज की यह महत्वपूर्ण पार्टी मीटिंग क्यों बुलाई गई है? हाल ही के आम चुनावों में हमारी पार्टी को जो करारी हार मिली है, उससे पार्टी का नाम भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज करने योग्य हो गया है। पार्टी इस ऐतिहासिक हार के लिए आप सब योद्धाओं का तहेदिल से आभार और धन्यवाद अदा करती है।
                पार्टी का यह सौभाग्य है कि उसे आप जैसे कर्मठ नेता और कार्यकर्ता मिले जिन्होंने कष्ट साध्य परिश्रम करते हुए पार्टी को प्रचंड हार का स्वाद चखाया। पार्टी की इस हार के लिये आप लोगों ने जिस तरह कंधे से कंधा मिलाकर ऐड़ी-चोटी का जोर लगाया है उससे पार्टी का माथा गर्व से ऊँचा हो गया है।
                साथियों, ऐसा सौभाग्य कभी-कभी ही आता है, जब कोई पार्टी अपनी आँखों के सामने अपनी ऐतिहासिक दुर्गति देखती है। आज हमारी पार्टी ने जो आलीशान मुकाम पाया है वह सिर्फ आप लोगों की वजह से। आप लोग यदि अपने व्यक्तिगत स्वार्थों, लालच और हाय-हाय को तिलांजलि देकर पार्टी के लिए पसीना न बहाते तो निश्चित ही हम चौतरफा हार का यह विहंगम दृष्य नहीं देख पाते।
                दोस्तों, कुछ कमजोरियाँ रही हैं। हारने के अथक प्रयासों के बाबजूद कहीं-कहीं हम जीत गए हैं। हालाँकि यह जीत उतनी शर्मनाक नहीं है, जितनी की मानी जा रही हैपरन्तु फिर भी हम जीत के कारणों का बारीकी से विश्लेषण करेंगें और सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में हमें कहीं किसी सीट पर जीत का सामना ना करना पड़े। इसके लिए जीते हुए उम्मीदवारों को स्वयं आगे आकर इस बात पर गहन चिंतन-मनन करना होगा कि आखिर उन्होंने कौन से ऐसे कुकर्म किये जो उन्हें हार की इस प्रचंड लहर में भी जीत का मुँह देखना पड़ा। पार्टी पूरी ज़िम्मेदारी से यह घोषणा करना चाहती है कि कुछ नालायक सदस्यों की जीत के लिए पार्टी का शीर्ष नेतृत्व रत्ती भर भी ज़िम्मेदार नहीं है। यदि कोई जिम्मेदार है तो सिर्फ और सिर्फ जनता जिसने हमारे पार्टी के उम्मीदवार की औकात को आँकने में गलती कर दी।
                मित्रों, लेकिन यह जीत का मातम मनाने का नहीं है, हार का जश्न मनाने का समय है। आइये हम सब मिलकर अपनी इस हार को इतने भव्य तरीके से सेलीब्रेट करें कि देश-दुनिया के दूसरे मुल्क हमारी इस हार से रश्क करें। जयहिंद।
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