Friday, February 18, 2011

मुसीबतें अविष्कारों की

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट
जनसंदेश टाइम्स लखनऊ में प्रकाशित
              कई लोगों को वैज्ञानिकों के किये कई अविष्कारों पर बड़ा गुस्सा आता होगा। जैसी इंचीटेप, तौलकाँटें, लीटर के माप, बिजली व बिजली के बल्ब, ताला-चाबी, किताब, चश्मा इत्यादि-इत्यादि। इन जैसे कई अविष्कारों ने लोगों को अपनी मनोकामनाएँ पूरी करने से बलात रोक रखा होता है।
          इंचीटेप न होता तो कपड़ची को कम कपड़ा नापने में सुविधा होती। टेप न हो तो ठेकेदार दस किलोमीटर सड़क को पाँच ही किलोमीटर बनाकर पूरे दस किलोमीटर के पैसे वसूल लेता और इन्जीनियर उसी सड़क को पन्द्रह किलोमीटर दिखाकर सरकारी खज़ाने को चूना लगा देता। किसी वैज्ञानिक ने तौलाकाँटा बनाया, वह यह कारस्तानी न करता तो किरानियों को कम सामान तौलने में कितनी सुविधा होती। लीटर के मापों का अविष्कार करके किसी दुष्ट वैज्ञानिक ने दूध वालों के लिए दिक्कत खड़ी की है।
          बिजली का अविष्कार कर वैज्ञानिकों ने पागलों के लिए कम मुसीबतें खड़ी नहीं की थीं कि किसी पागल वैज्ञानिक ने बिजली के बल्ब का अविष्कार कर मारा। इस बिजली के बल्ब से चोर-लुटेरों की नफरत किसी से छुपी हुई नहीं है, प्रेमियों को भी रात के अंधेरे में न मिलने देने के लिए यह बल्ब ही सबसे बड़ा जिम्मेदार है। यह बल्ब न होता तो चोर चैन से चोरी कर पाते और प्रेमी प्रेमलीला रचा पाते। इन दोनों का ही बस चलें तो ये दुनिया के सारे बल्ब तोड़ मारें। ताला-चाबी भी इसी तरह का अविष्कार है जो चोरों और प्रेमियों के भीतर गुस्सा पैदा करता है। इन दोनों में से कोई एक न होता तो चोर और प्रेमी दोनों का ही काफी काम बन जाता।
          किताबों और चश्मे के अविष्कार ने दुनिया को काफी रुला रखा है। किताब दुनिया में आई तो छात्रों को उसे पढ़ने का अप्रिय श्रम करना पड़ रहा है और चश्में के अविष्कार ने ऐसे-ऐसे पढ़ाकू पैदा कर दिये जो न केवल दुनिया भर की किताबें चट किये दे रहे हैं बल्कि वे जितने दिन जीवित रहेंगे उतने दिन किताबें रच-रचकर दुनिया पर भारी-भरकम साहित्य का बोझ बढ़ाते रहेंगे। चश्मा न होता तो आखिर आदमी कितना पढ़ता और कितना लिखता। आँख कमज़ोर होने के बाद चुपचाप एक कोने में बैठा रहता। कई लोगों को राहत मिलती।

6 comments:

  1. हा हा हा ....क्या लिखते हैं सर आप भी:)

    मज़ा आ गया.

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  2. shabdon ka sahara lekar aapne sachhai samne rakhdi achha vyangy badhai

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  3. समयानुकूल रचना है.

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  4. सुंदर. पैनी नज़र है आपकी :)

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  5. नापने वालों से बहुत लोग घबराते हैं।

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