//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//
वे कह रहे
थे कि आखरी साँस तक जनता की सेवा करते रहेंगे। अजीब ज़बरदस्ती है। जनता चाहे या न
चाहे लेकिन आप बिना बात उसकी सेवा करते रहोगे। यह भी कोई बात हुई? चलो उमड़ा ही
आ रहा हो बहुत सेवाभाव तो अपने से बड़े-बज़ुर्गों, गुरुओं, सीनियरों की सेवा करो, उनके हाँथ-पाँव दबाओ, उनको तो आपने मार्गदर्शक मण्डल में डाल रखा है और आज तक
कोई मार्गदर्शन लेने की ज़हमत भी नहीं उठाई और बेचारी जनता की सेवा कर-करके उसे निठल्ला
कामचोर बनाने की योजना बना रखी है। श्रीमान जी जनता थक गई है आपसे सेवा
कराते कराते। पहले ही आप उसकी काफ़ी सेवा कर चुके हो, सेवा
क्या आपने तो अपनी पूरी सरकार ही झौंक दी जनता की सेवा करने में। अठारह-अठारह घंटे
ऐट ए टाइम सेवा की है आपने । भारत तो भारत आपने तो दुनिया भर में घूम-घूमकर जनता
की सेवा कर मारी। आपके एक मंत्री ने तो एप्स्टीन के आइलैंड पर जाकर जनता की सेवा
की। आपके अन्य मंत्री सांसद गण भी तब तब घर में बैठे बैठे जनता की सेवा करते रहते
हैं जब जब वे संसद में बैठे राष्ट्रीय सेठों की सेवा नहीं कर रहे होते हैं।
अब रहने भी
दो आदरणीय,
बहुत
सेवा कर ली आपने। और ज़्यादा सेवा करोगे तो जनता को बदहज़मी हो जाएगी। आपने
नोटबंदी करके जनता की पर्याप्त सेवा कर ली, आपने
जीएसटी लाकर जनता की प्राणप्रण से सेवा कर ली, आपने
किसानों की चिर सेवा करने के लिए तीन क़ानून बना दिए थे लेकिन किसान मूर्ख साबित
हुए,
उन्होंने
आपको अपनी सेवा का मौका न देकर कानून वापस करवा दिए। आपने तूफान महँगाई का रिकॉर्ड
कायम कर क्या कम सेवा की है जनता की जो आप बेरोज़गारी का भी रिकॉर्ड क़ायम कर जनता
की सेवा करना चाहते है? आप देश की
हर चीज़ अपने एक अकेले दोस्त को दान में देकर जनता की सेवा करना चाहते हैं। जंगल
उसे देकर जनता की सेवा कर रहे हैं, आदिवासियों
की ज़मीन उसको देकर जनता की सेवा कर रहे हैं, पोर्ट,
एयरपोर्ट,
रेलवे
स्टेशन,
बैंक,
एलआईसी
आदि आदि सब अपने प्यारे दोस्त को देकर जनता की सेवा कर रहे हैं,
इतना
काफ़ी नहीं है जो आप दुनिया के सामने अभी और भी जनता की सेवा करने का रिकॉर्ड
बनाना चाहते हैं ?
अजी
आपके बाकी के छोटे-मोटे दोस्त भी काफी बड़ी-बड़ी रकम के चुनावी बाँड खरीदते हैं
आपके लिए,
भर-भर
कर चंदा देते हैं आपकी पार्टी को, गाड़ी-घोड़े
चार्टर प्लेन वगैरह भी देते रहते हैं भागने दौड़ने और उड़ने के लिए और चाहते हैं
कि उनकी भी थोड़ी बहुत सेवा की जाए आपके द्वारा लेकिन आगे आकर कुछ भी कहने से डरते
हैं कि कहीं उन्हें भी अपने दोस्त के हवाले करके आप उनकी भी सेवा ना कर डालो।
यह ठीक है
कि जनता की सेवा करना बड़े पुण्य का काम है और आप किसी भी कीमत पर यह पुण्य कमाना
चाहते हो लेकिन हर चीज़ की एक सीमा होती है साहब। आख़िर कितनी सेवा करोगे जनता की।
विपक्ष को भी थोड़ी बहुत जनता की सेवा करने का अधिकार है कि नहीं है ? वह भी चाहता है कि आपकी तरह जनता
की सेवा करके पुण्य कमाए, लेकिन आप
उन्हें कोई मौका ही नहीं देना चाहते। साम दाम दंड भेद अपनाकर जनता की सेवा करने
का मौका बस खुद अपने ही पास हड़पे रखना चाहते हो। यह अच्छी बात नहीं है। यह सरासर
अन्याय है। हमारे देश में लोकतंत्र है, इसलिए सभी
को बराबरी से जनता की सेवा करने का मौका मिलना चाहिए। ऐसा कैसे चलेगा कि बस आप ही
आप जनता की सेवा करते रहो और दूसरा कोई जनता की सेवा के करने के लिए हाथ-पाँव मारे
तो उसे देशद्रोही का खिताब दे दिया जाए।
देखिए साहब,
समय
बड़ा खराब चल रहा है, जनता के दिमाग का कोई भरोसा नहीं।
कहीं वह अपनी सेवा खुद ही कर लेने के क्रांतिकारी मूढ़ में आ गई तो फिर आपको ज़िंदगी
में कभी जनता की सेवा करने का मौका नहीं मिलेगा। थोड़ा सोच समझ कर सेवा कीजे जनता
की साहब। समय खराब चल रहा है।
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