मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

दरबारी सुरक्षा में चोरों की बजती बंसी

//व्‍यंग्‍य-प्रमोद ताम्‍बट//

राजा ने चोरों के एक प्रतिनिधिमंडल को गोपनीय रूप से मिलने के लिए बुलाया । चोरों के आते ही राजा ने अन्य प्रतिनिधिमंडलों को जल्दी-जल्दी चलता कर चोरों के प्रतिनिधिमंडल को चर्चा के लिए बुला लिया और उनकी राजसी आवाभगत तथा पीने-खाने की बेहतरीन व्यवस्था का जायज़ा लेते हुए कहा- राज्य को आज आप लोगों की सेवा की सख्त ज़रूरत आन पड़ी है।

चोरों का प्रतिनिधिमंडल बोला- आपकी आज्ञा सर-आखों पर, बताइए महाराज, हम आपकी क्या सेवा कर सकते हैं ?

राजा का खास मंत्री बोल पड़ा- सेवा-वेवा गई चूल्‍हे में। आप लोगों ने दरबार के साथ बदमाशी चालू कर दी है। दरबार को आने वाला चोरी का हिस्सा दिन पर दिन कम होता जा रहा है। ये सरासर गलत बात है। दरबार तुम लोगों को इस नामाकूल हरकत की कड़ी से कड़ी सज़ा दे सकता है, समझे ?

चोरों का नेता बोला- महाराज हम तो पूरी मेहनत और लगन से कोशिश कर रहे हैं। ज़्यादा से ज़्यादा चोरियाँ कर रहे हैं और दरबार का हिस्‍सा समय पर खज़ाने तक पहुँचा रहे हैं। लेकिन फिर भी आजकल हमारे साथ बड़ा अत्याचार हो रहा है आपके राज में। पुलिस वाले बड़ी गंभीरता से चोरों की पकड़-धकड़ के काम में लगे हुएँ हैं। हमारा स्वतंत्रतापूर्वक चोरी करना मुश्किल हो गया है, जबकि हम चोरी में बराबर पुलिस को भी हिस्सा देते चले आ रहे हैं।

राजा बोला- पुलिस को पकड़-धकड़ के काम के लिए ही रखा गया है तो वे तो अपना काम मुस्‍तैदी से करेंगे ही। आप लोग अपने कौशल को और उन्नत कीजिए। पुलिस से बच निकलने के नए-नए तरीके निकालिए। दरबार आपका पूरा साथ देगा।

चोर प्रतिनिधि बोला- महाराज, पुलिस से बचने में ही हमारी सारी शक्ति समाप्त हो जाती है । आखिर हम कब तो चोरी करें और कब पुलिस से बचने का कौशल उन्नत करें। इसी फालतू की उठापटक में हमारा सारा समय बर्बाद हो जाता है और हमारी नेट इंकम कम हो जाती है। इसीलिए दरबार के हिस्से में भी गिरावट आ जाती है। ऊपर से छोटे-मोटे दरबारी अफसर-कर्मचारी भी परेशान करने लगते हैं। फिर अलग से उन्हें भी दो। ऐसे बाँटते ही रहेंगे तो कैसे चलेगा महाराज?

राजा बोला- देखो, जिसको जिस काम के लिए रखा गया है उसको तो वह काम करना ही पड़ता है। फिर दरबार का संरक्षण मिला हुआ हो तो दरबारी थोड़ा बहुत तो उन्‍मत्‍त हो ही जाते हैं ।

चोर बोले- हम भी तो दरबार के लिये ही काम करते है महाराज। हमें भी संरक्षण मिलना चाहिए। यकीन मानिए हमें दरबार का संरक्षण मिल जाए तो हम राज्य का खज़ाना लबालब भर देंगे। राज्‍य को दूसरा कोई दंद-फंद करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी।  

राजा और खास मंत्री ने इस बात को गंभीरता से लेकर तुरंत आपस में गहन मंत्रणा की और फिर राजा अपने मोर का दाना खिलाता हुआ बोला- ठीक है। राज्य में चोरों को उनके किए गए चोरी के समस्त कार्यों के लिए दीवानी या आपराधिक मुकदमों और सजाओं से सुरक्षा प्रदान करने हेतु दरबार द्वारा शक्तिशाली कानून बनाकर संरक्षण प्रदान किया जाएगा। चोर संप्रदाय राज्य के हित में भरपूर चोरियाँ करें और निश्चिंत रहें।

सारे चोर ख़ुशी से कूँदते हुए चिल्लाए- हुर्रे हुर्रे हुर्रे।

और फिर राज्य में जोर-शोर से चोरियाँ होना चालू हो गईं। चोरी होती, लोग रोते-गाते पुलिस के पास जाते, पुलिस एक्‍शन मोड़ में आती, चोर को पकड़ती, चोर कानून का पोथा पलटकर दिखा देते और चोरों को दरबारी संरक्षण का प्रावधान देखकर पुलिस चुप लगा जाती। मामला ठंडा पड़ जाता। दिन पर दिन राज्‍य में चोरियाँ बढ़ती गईं, बढ़ती गईं । तंग आकर पुलिस ने चुप लगाना बंद कर चोरी की शिकायत करने आने वालों को ही डरा धमकाकर, एफ.आई.आर, पिटाई, मुकदमा, बामशक्‍कत सज़ा और अंडा सेल इत्‍यादि का डर दिखाकर भगाना चालू कर दिया। यहाँ तक कि चोर लोग पुलिस वालों तक के यहाँ भी चोरियाँ करके भागने लगे लेकिन पुलिस वालों को मजबूरी में अपना मुँह सिले बैठे रहना पड़ता था क्‍योंकि चोरों को कानूनी संरक्षण था ।

चोरों के औसान बढ़‍ते गए और उन्‍होंने राज्य के खज़ाने में भी सेंध मारना शुरू कर दिया परंतु खज़ाना मंत्री, खास मंत्री और राजा के पास चुप रहने के अलावा दूसरा कोई चारा ही नहीं था क्‍योंकि रायता तो उन्‍हीं का फैलाया हुआ था । चोरी के धंधे ने एक असाध्य रोग की तरह पूरे राज्य को अपने शिकंजे में ले लिया। सबसे ज़्यादा क्रांतिकारी परिवर्तन तो यह आया कि आम गऊ जैसी सीधी-साधी प्रजा भी धड़ल्ले से चोरी के कारोबार में कूद पड़ी क्योंकि राज्य में चोरों के लिए भय मुक्त वातावरण तथा दीवानी या आपराधिक मुकदमों और सजाओं से सुरक्षा प्रदान करने वाला कानून लागू था।

चोरों के आतंक से ग्रस्‍त इस राज्‍य की देखा-देखी आसपास के राज्‍यों में भी विभिन्‍न  महकमों में मुकदमों और सज़ाओं से सुरक्षा प्रदान करने वाले कानून लागू होने लगे। किसी ने कानून, गृह और रक्षा मंत्रालय के लिए यह कानून लागू कर दिया किसी ने चुनाव आयोग के लिए । दरबारी सुरक्षा के घेरे में चारों ओर चोरों की बंसी बजने लगी और कुछ लोग बंसी की उस धुन पर सिर हिला-हिलाकर आनंद की अनुभूति में तैरने-उतराने लगे ।

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