//व्यंग्य - प्रमोद ताम्बट//
अब तक मैं
यह दृढ़ता से मानता था कि भूत-प्रेत, जिन्न-पिशाच
आदि का कोई अस्तित्व नहीं होता, यह सब
इंसानों की कपोल कल्पनाएँ हैं और किसी न किसी प्रकार की शारीरिक,
मानसिक
डेफिशियेंसी का नतीजा हैं लेकिन जबसे रहस्यमय रूप से मरे हुए मिस्टर एपस्टीन ने
सामने आकर दुनिया भर के राजनीतिज्ञों की नाक में दम करना चालू किया है मैं मानने
लगा हूँ कि निश्चित ही भूत-प्रेत, जिन्न-पिशाच
न केवल होते हैं बल्कि वे बाकायदा लोगों की नींद भी हराम करते हैं। एपस्टीन का भूत
बार-बार फ्लोरिडा के एक कब्रिस्तान की किसी अनाम कब्र में दफ्न कॉफिन से निकलकर
लोगों की नींद हराम करता रहता है। वह वहाँ से यहाँ सात समंदर पार देवी-देवताओं की
सिक्युरिटी से लैस भारतवर्ष के आसमान में अवतरित होकर दिल्ली के रायसीना हिल्स
एरिया में मंडराने लगता है और जब वह वहाँ मंडरा रहा होता है तो पूरे भारतवर्ष में
नैतिकता के सिपहसालारों की धड़कनें तेज़ गति से ऊपर-नीचे होने लगती हैं और कुछ
संस्कारों के पुतले तो सीधे वेंटीलेटर पर ही चले जाते हैं।
लेकिन
नैतिकता के कुछ सिपहसालार ऐसे भी होते हैं जिनकी सेहत पर चाहे कुछ भी हो जाए कोई
फर्क नहीं पड़ता। ऐयाशियों के समाचार, वीडियो,
सीसीटीवी
फुटेज उनकी नींद नहीं उड़ाते क्योंकि उनका ध्यान हमेशा अपने लक्ष्य की ओर होता है।
ताँगे में जुते घोड़े की तरह वे अपनी आँखों पर बँधी पट्टी के नियंत्रण में इधर-उधर
ना ताककर बस सामने ही देखते चलते हैं, चाहे फिर
एपस्टीन का भूत उन्हें मल्टीप्लेक्स के बड़े से बड़े पर्दे पर उनके प्रिय हीरो
द्वारा अभिनीत पूरी की पूरी फीचर फिल्म ही क्यों न दिखा दे। वे कुकर्म के आरोपियों
को फूलमालाओं से लादने, मिठाइयाँ
बाँटने में ज़्यादा आनंद महसूस करते हैं, उनका हीरो
चाहे एपस्टीन की ऐशगाह में ऐयाशी करे चाहे रेड लाइट एरिया में,
उनकी
सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता । एपस्टीन का भूत उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
एपस्टीन के
भूत की यह खासियत है कि वह जन्म जन्म के बदमाश और लुच्चों को बिल्कुल परेशान नहीं
करता बस महान संस्कारी लोगों की ही नींद उड़ाता है। अमरीकी प्रथम पुरुष ट्रम्प से ज़्यादा
बदनाम इंसान दुनिया भर में भला कौन है इस समय। एपस्टीन की ऐशगाह में से छनकर बाहर
निकलकर आने वाली तमाम अश्लील तस्वीरों में ट्रम्प जी ही अब तक सबसे ज़्यादा बार
दिखायी दिए हैं और उनकी ऐयाशियों के चर्चे भी दुनियाभर में आम हैं,
लेकिन
एपस्टीन का भूत ट्रम्प को बिल्कुल परेशान नहीं करता। वह आराम से दुनिया का दारोगा
बना दादागिरी छाँटता फिरता है । उसे रत्ती भर भी डर नहीं लगता कि एप्सटीन के साथ
नाम जुड़ने पर अमेरिका की जनता उसे कुर्सी से उतार फेंकेगी या तोड़ेगी-फोड़ेगी।
लेकिन हमारे यहाँ के रात दिन पूजा पाठ अनुष्ठान में लगे रहने वाले संस्कारी और
चरित्रवान लोग एपस्टीन का भूत सामने आते ही निश्चित ही हनुमान चालीसा का पाठ करने
लगते होंगे। भारतीय हनुमान भक्त यह जो मानते हैं कि- “भूत
पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे”
का
पाठ करने के बाद दुनिया का चाहे जितना भी ताकतवर भूत हो निकट आ ही नहीं सकता। लेकिन,
एपस्टीन के भूत के मामले में यह चौपाई महज़ अफवाह साबित हो रही है। एपस्टीन का भूत
बार-बार बाहर आ जाता है और एसपीजी, एनएसजी
सुरक्षा घेरे को तोड़कर एकदम निकट आकर कुर्सी के ठीक ऊपर मंडराने लगता है। देखने
वालों को धुकधुकी लगी रहती है कि कुर्सी लेकर अब उड़ा कि तब उड़ा। जाने कब वह सत्ता
के सारे स्तंभों को धता बताकर कुर्सी, सत्ता और
सत्ताधारी हर शक्ति को हवा में अदृष्य कर दे।
अच्छा,
भूत
हो या न हो,
उसके
नाम मात्र से लोगों के हाथ के तोते ही नहीं इस प्रजाति के सभी पक्षी न जाने कहाँ उड़
जाते हैं। किसी भी कारण से एपस्टीन के आईलेंड के आसपास तक से गुजरे लोगों का भी
यही हाल है,
वे
तोतों की तरह इधर-उधर उड़ते-फिरते नज़र आते हैं। लेकिन हमारे देश में एपस्टीन के
भूत का नाम सुनते ही विपक्षी पार्टियों, विरोधी
विचारधारा वाले सभी लोगों में नया उत्साह, नई
स्फूर्ति,
नई
जान आ जाती है। वे बेसब्री से पलक पावड़े बिछाकर बैठ जाते हैं कि एपस्टीन का भूत
इस बार ज़रूर कोई नया फोटो या फाइल उनके हाथ में पकड़ा कर जाएगा जिससे ज़रूर उनका
राजनैतिक वनवास समाप्त होकर नई संभावनाएँ पैदा हो जाएँगी और उन्हें सत्ता का आनंद
लूटने का मौका मिलेगा। लेकिन सत्ता पक्ष अपनी नीम चुप्पी और इस कान से सुनकर उस
कान से निकाल देने का अजर-अमर टोटका अपनाकर, और
ईडी,
सीबीआई
इन्कमटैक्स का मंत्र फूँककर विपक्ष की तमाम आशाओं पर पानी फेर देता है।
फिलहाल
एपस्टीन का भूत भारत भूमि के आसमान पर फिर से मंडरा ज़रूर रहा है लेकिन विपक्ष में
खड़ी एक बहुत बड़ी फौज को कोई बड़ा फायदा नहीं पहुँचा पा रहा है और छोटे-मोटे डेंट
से पक्ष को कोई फर्क पड़ना कब का बंद हो चुका है लेकिन आसमान में मंडरा रहे
एपस्टीन के भूत को देखकर किसी अज्ञात बड़े डेंट के डर से उसकी नींद भी उड़ी हुई
है।
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